पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग

विभाग का संक्षिप्त परिचय :

यद्यपि त्रिपुरा में पत्रकारिता का आरंभ सन्1905 में पहले समाचारपत्र “अरुण” के प्रारंभ होने के साथ ही हो गया था, किन्तु पत्रकारिता-शिक्षा राज्य मेंविलंब से प्रारंभ हुई। महज एक दशक पहले, भवन्स त्रिपुरा कॉलेज ने पत्रकारिता औरजनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा की शुरुआत की है।इससे पूर्व राज्य में पत्रकारिता की शिक्षा इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम सेही उपलब्ध थी। ये दोनों संस्थान दूरस्थ शिक्षा माध्यम से छात्रों को सामाजिक सरोकार से संबंधित इसमहत्त्वपूर्ण पेशेके शैक्षणिक पक्ष से रूबरू होने का अवसर प्रदान करते हैं।तीव्रगति से बदलती सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की दुनिया में, संचार में कैरियरनिर्माण पूरे देश में सबसे अधिक लोकप्रिय कैरियर है।जनसंचार के क्षेत्रमें अनेक रोज़गार उपलब्ध हैं। टीवी चैनलों की भरमार, एफएम रेडियो, समाचारपत्र-पत्रिकाओं और वेबसाइटों को प्रशिक्षित मीडिया कर्मियों की आवश्यकताहोती है।इनके अलावा, गैर-पत्रकारिता से संबंधित क्षेत्र में भी जनसंपर्क, मार्केटिंग और विज्ञापन विकास संचार, इवेंट मैनेजमेंट आदि क्षेत्रों मेंपर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं।इन तमाम संस्थानोंको वैसे मीडिया कर्मियों की तलाश हैजो प्रशिक्षित हैं और जिनमें सृजनात्मक निपुणता है।जनसंचार औरपत्रकारिता पाठ्यक्रम, वह पाठ्यक्रम है जो संचार आधारित बाज़ार की आवश्यकताओं की पूर्तिकरता है।इसी क्रम में, राज्य के लोगों की रूचि को ध्यान में रखकर और राज्य मेंपत्रकारिता और जनसंचार के परिदृश्य के स्तर को ऊँचा उठाने के उद्देश्य से दिनांक 7अगस्त, 2009को त्रिपुरा विश्वविद्यालय के अंतर्गत पत्रकारिता एवं जनसंचार में द्विवर्षीय (चारसत्र) एम.ए. कार्यक्रम की शुरुआत की गयी।यह सबकुछ कुछ प्रतिष्ठितपेशेवर पत्रकारों और त्रिपुरा वर्किंग जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन की पहल से संभव हुआ। विभाग का लक्ष्य ऐसी गुणवत्तापूर्ण जनशक्ति को जनमाध्यम की शिक्षा द्वाराप्रशिक्षित करना है जो समाज और त्रिपुरा के मीडिया परिदृश्य, पूर्वोत्तर औरपूरे भारत में बदलाव के कारक बन सकें।नए विभाग के तौर परइस केन्द्र में संचार क्षेत्रों में विशेषज्ञ तीन नियमित एवं चार अतिथिशिक्षकों को नियुक्ति की गई है। इसमें किसी प्रकार कासंदेह नहीं कि आनेवाले वर्षों में, यह दूर-दूर के विद्यार्थियों को आकर्षित करने वालाजनसंचार की शिक्षा का बड़ा केन्द्र बनकर उभरेगा।इसमें आश्चर्य करने की कोई बात नहीं हैकि अपने प्रारंभिक वर्ष में ही तीन सौ से अधिक छात्रों ने प्रवेश हेतु आवेदन किया था, लेकिन उनमें से सिर्फ 25 छात्र ही ऐसे भाग्यशाली रहे जिन्हें प्रथम शैक्षिक सत्र 2009-10 में नामांकन मिला। इन छात्रों में से पाँच कार्यरत पत्रकारऔर शेष इसक्षेत्र हेतु नए छात्र थे।.

स्थापना वर्ष :

2009

विभागाध्यक्ष :

श्री। सुनील कलाई

 

 

कुल विजिटर्स की संख्या : 3561980

सर्वाधिकार सुरक्षित © त्रिपुरा विश्वविद्यालय

अंतिम अद्यतनीकरण : 02/07/2022 02:03:25

रूपांकन एवं विकास डाटाफ्लो सिस्टम