ललित कला विभाग

विभाग का संक्षिप्त परिचय :

ललित कला  विभाग ने अपनी यात्रा वर्ष 2009 में शासकीय कला एवं शिल्प महाविद्यालय, लिचुबगान, अगरतला में महज कुछ अतिथि व्याख्याताओं के साथ शुरू की। वर्ष 2011 में इसे त्रिपुरा विश्वविद्यालय परिसर के अंतर्गत विभिन्न भागों में बांटकर कुछ को मुक्त मंच (ओपन थियेटर) के कक्ष में, कुछ को डे केअर सेंटर में तथा कुछ भाग को एनर्जी पार्क में स्थापित किया गया। अंतत: वर्ष 2016 में विभाग को अकादमिक भवन-II के भूतल में शिफ्ट किया गया। विभाग चित्रकारी एवं पैंटिंग तथा मॉडेलिंग एवं मूर्तिकला में एमएफए डिग्री प्रदान करता है। सीबीसीएस पद्धति के अंतर्गत एमएफए पाठ्यक्रम को 04 सेमेस्टर में विभक्त किया है। विभाग की प्रवेश क्षमता 26 छात्रों की है, जिसमें से ड्राइंग एवं पेंटिंग तथा मॉडेलिंग एवं मूर्तिकला में 16:10 के अनुपात में प्रवेश प्रक्रिया को रखा गया है। इस पाठ्यक्रम का मूल सिद्धांत स्टूडियो आधारित है जहां विभाग द्वारा पृथक तौर पर ड्राइंग एवं पेंटिंग तथा मॉडेलिंग एवं मूर्तिकला के पृथक सेक्शन संचालित किए जाते हैं। विभाग हेतु संकाय सदस्यों की कुल स्वीकृत पांच पदों में से संप्रति, चार संकाय सदस्य कार्यरत हैं। विभाग द्वारा तैयार किए गए पाठ्यक्रम देश के अन्य केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के बराबर हैं। विभाग में देश के विभिन्न भागों यथा – प. बंगाल, बिहार, अंदमान एवं निकोबार तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र से छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं।

विभाग ने अकादमिक सत्र 2014-15 में  पीएच.डी. पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया है। विभाग में संप्रति, 06 शोधार्थी शोध-कार्य हेतु पंजीकृत हैं जिनका मुख्य उद्देश्य स्थानीय मुद्दे तथा स्थानीय कला एवं शिल्प और दुर्लभ अथवा खत्म हो रही जनजातीय लोक कला तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र की विभिन्न पारंपरिक पद्धतियों पर शोध कार्य करना है।

विभाग में कार्यरत सभी संकाय सदस्य बेहद सक्रिय तथा रचनात्मकता से परिपूर्ण हैं तथा वे अपने छात्रों में कलात्मक निखार लाने के उद्देश्य से उसे सदैव प्रेरित करते रहते हैं। सभी संकाय सदस्यों को अपने-अपने क्षेत्र में महारत हासिल है तथा विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के दृश्य कार्यक्रमों में उन्होंने सहभागिता कर प्रतिष्ठा हासिल की है। प्रत्येक वर्ष विभाग वार्षिक कला प्रदर्शनी का आयोजन कर अपने छात्रों की कलात्मकता को परिमार्जित एवं प्रोत्साहित करता है। विभाग राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यशालाओं एवं प्रदर्शनियों का भी आयोजन ललित कला अकादमी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय आदि के साथ मिलकर तथा उनके संयुक्त तत्वावधान में करता है।

विभाग के पास कई परियोजना आधारित कार्यक्रम हैं जिसके लिए उसे तत्संबंधी विशेषज्ञता वाले शोधार्थी की आवश्यकता होती है तथा उन शोधार्थियों की विशेषज्ञता को भविष्य के शोध कार्य में उपयोगिता का आधार माना जाता है। संप्रति, विभाग के पास विभिन्न फंडिंग एजेंसियों की निम्नलिखित शोध परियोजनाएं हैं :

स्थापना वर्ष :

2009

विभागाध्यक्ष:

प्रो. राजेश भौमिक

कुल पूर्ण शोध परियोजनाएं :

06, मूल्यरु. 27,55,000/-

जारी शोध परियोजनाएं :

01, मूल्य रु. 14,98,000/-

 

 

कुल विजिटर्स की संख्या : 4978739

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अंतिम अद्यतनीकरण : 24/06/2024 02:03:41

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